माघ मास का माहात्म्य – पंचम अध्याय
श्री दत्तात्रेय भगवान राजा से कहने लगे—“हे राजन्! अब मैं तुम्हें एक प्राचीन और परम पुण्यदायी इतिहास सुनाता हूँ।” भृगुवंश […]
श्री दत्तात्रेय भगवान राजा से कहने लगे—“हे राजन्! अब मैं तुम्हें एक प्राचीन और परम पुण्यदायी इतिहास सुनाता हूँ।” भृगुवंश […]
श्री वशिष्ठजी राजा दिलीप से कहने लगे—“हे राजन! अब मैं तुम्हें माघ मास के उस अनुपम माहात्म्य का वर्णन करता
तब राजा दिलीप ने गुरु वशिष्ठजी से विनम्र भाव से पूछा—“हे गुरुदेव! यह पर्वत कितना ऊँचा है और इसकी लंबाई-चौड़ाई
राजा के ये वचन सुनकर वह तपस्वी बोले—“हे राजन्! अब भगवान सूर्यदेव के शीघ्र उदय होने का समय निकट है।
एक समय की बात है। महर्षि सूतजी ने अपने गुरु वेदव्यासजी से विनयपूर्वक कहा—“हे गुरुदेव! मैं आपका शिष्य हूँ। कृपा