माघ मास का माहात्म्य – पच्चीसवाँ अध्याय
पिशाच ने मुनि से विनयपूर्वक कहा — हे महर्षि! आपने जिस केरल देश के ब्राह्मण के मोक्ष की कथा बताई, […]
पिशाच ने मुनि से विनयपूर्वक कहा — हे महर्षि! आपने जिस केरल देश के ब्राह्मण के मोक्ष की कथा बताई, […]
लोमश ऋषि कहने लगे कि वह राजा पहले तामिश्र नामक नरक में गया, फिर अंधतामिश्र नरक में पहुँचा, जहाँ उसने
लोमश ऋषि कहने लगे कि जिस पिशाच को देवद्युति ब्राह्मण ने मुक्त किया था, वह अपने पूर्व जन्म में द्रविड़
इतना कहकर भगवान विष्णु अंतर्ध्यान हो गए। तब देवनिधि विनयपूर्वक बोले —“हे महर्षि! जैसे गंगाजल में स्नान करने से मनुष्य
लोमश ऋषि कहने लगे कि प्राचीन काल में अवंती देश में वीरसैन नाम का एक प्रतापी राजा हुआ करता था।
वेदनिधि ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर लोमश ऋषि से कहा—“हे महर्षि! कृपा करके शीघ्र धर्म का उपदेश दीजिए, क्योंकि श्राप की
वशिष्ठ ऋषि कहते हैं—वे पाँचों गंधर्व कन्याएँ इस प्रकार विलाप करती हुई बहुत देर तक वहाँ प्रतीक्षा करती रहीं। जब
श्री वशिष्ठ ऋषि बोले—“हे राजन! मैंने तुम्हें दत्तात्रेय जी द्वारा वर्णित माघ मास (Magh Maas) का माहात्म्य सुना दिया, अब
अप्सरा कांचन मालिनी कहने लगी—“हे राक्षस! उस ब्राह्मण ने मुझे यह उपदेश दिया कि जैसे इंद्र माघ स्नान के प्रभाव
कार्तवीर्य बोले—“हे भगवन्! वह राक्षस कौन था और कांचन मालिनी कौन थी? उसने अपना पुण्य किस प्रकार दिया और उन