श्री राधा चालीसा
॥ दोहा ॥ श्री राधे वृषभानुजा, भक्तन प्राणाधार । वृन्दावन-विपिन विहारिणी, प्रणवौं बारम्बार ॥ जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम […]
॥ दोहा ॥ श्री राधे वृषभानुजा, भक्तन प्राणाधार । वृन्दावन-विपिन विहारिणी, प्रणवौं बारम्बार ॥ जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम […]
॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।अरुण अधर जनु बिंब फल, नयन कमल अभिराम ॥पूर्ण इन्द्र
॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥बुद्धिहीन तनु जानिके,
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरजापति
॥ मंगलाचरण दोहा ॥ जय हो गणपति, गुणों के भंडार। कृपा करो हे शंभु सुत, संकट हरो हमारे बारंबार।।विघ्न विनाशक,