श्रावण माह का महात्म्य – चौथा अध्याय
ईश्वर ने सनत्कुमार जी से कहा — हे सनत्कुमार! अब मैं तुम्हें धारण-पारण व्रत की विधि बताता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो। […]
ईश्वर ने सनत्कुमार जी से कहा — हे सनत्कुमार! अब मैं तुम्हें धारण-पारण व्रत की विधि बताता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो। […]
सनत्कुमार जी ने कहा, “हे भगवन्! आपने जो व्रत समुदाय के उद्देश्य बताए, वे अत्यंत कल्याणकारी हैं, परंतु मेरे हृदय
शंकर जी ने सनत्कुमार जी से कहा — “हे महाभाग! आप ब्रह्मा के पुत्र होकर भी अत्यंत नम्र और श्रद्धालु
शौनक जी ने सूत जी से पूछा — “हे महाभाग! आपके मुख से अनेक आख्यान सुने, परन्तु मुझे तृप्ति नहीं
लाखों की जनसंख्या को अपने में समेटे कुशीनगर एक महानगर था। जैसी कि अन्य महानगरों की जीवनचर्या होती है, वैसा
किसी भी कार्य को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए उसके कुछ नियम होते हैं। इन नियमों का पालन करके प्राणी
कीर्तन जय नारायण प्राण आधार। जय महा लक्ष्मी भरे भण्डार।श्री हरि प्रभु की प्रेरणा शारदा जीभा आई। जग के तारन
॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।अरुण अधर जनु बिंब फल, नयन कमल अभिराम ॥पूर्ण इन्द्र
सरस्वति नमस्तुभ्यं, वरदे ज्ञानरूपिणि।विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा॥ या कुन्देन्दुतुषारहारधवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा, या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता।सा मां पातु
जय शक्ति जय जय महाकाली।जय शक्ति जय जय महाकाली। आदि गणेश मनाऊं दाती। चरणण शीश नवाऊं दाती। तेरे ही गुण