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Author name: Kuber Marg

श्री वैभवलक्ष्मी व्रतकथा
Vrat

श्री वैभवलक्ष्मी व्रतकथा

लाखों की जनसंख्या को अपने में समेटे कुशीनगर एक महानगर था। जैसी कि अन्य महानगरों की जीवनचर्या होती है, वैसा

महा लक्ष्मी स्तोत्र
Stuti

महा लक्ष्मी स्तोत्र

कीर्तन जय नारायण प्राण आधार। जय महा लक्ष्मी भरे भण्डार।श्री हरि प्रभु की प्रेरणा शारदा जीभा आई। जग के तारन

श्रीकृष्ण चालीसा
Chalisa

श्रीकृष्ण चालीसा

॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।अरुण अधर जनु बिंब फल, नयन कमल अभिराम ॥पूर्ण इन्द्र

सरस्वती स्तुति
Stuti

माँ सरस्वती स्तुति

सरस्वति नमस्तुभ्यं, वरदे ज्ञानरूपिणि।विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा॥ या कुन्देन्दुतुषारहारधवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा, या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता।सा मां पातु

महा काली स्तोत्र
Stuti

महा काली स्तोत्र

जय शक्ति जय जय महाकाली।जय शक्ति जय जय महाकाली। आदि गणेश मनाऊं दाती। चरणण शीश नवाऊं दाती। तेरे ही गुण

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