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श्री वैभव लक्ष्मी व्रत हेतु विधि-विधान

किसी भी कार्य को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए उसके कुछ नियम होते हैं। इन नियमों का पालन करके प्राणी जटिल-से-जटिल कार्यों में भी सफलता प्राप्त कर लेता है। माँ वैभव लक्ष्मी के व्रत को रखने के लिए हमारे धर्मगुरुओं ने कुछ नियम निर्धारित किए हैं:

व्रत रखने का दिन और पात्रता

  • यह व्रत शुक्रवार के दिन रखा जाता है।
  • श्रद्धालु, कुँवारी कन्याएँ, विवाहित महिलाएँ एवं पुरुष सभी यह व्रत कर सकते हैं।
  • यदि पति-पत्नी मिलकर यह व्रत करें तो माँ लक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं।

व्रत की संख्या और भावना

  • यह व्रत 7, 11, 21, 31, 51, 101 या उससे अधिक शुक्रवारों तक किया जा सकता है।
  • मन और विचार शुद्ध रखने चाहिए।
  • व्रत केवल धन प्राप्ति हेतु नहीं, माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने की भावना से किया जाना चाहिए।

विशेष परिस्थितियाँ

  • घर से बाहर रहने पर उस शुक्रवार को व्रत स्थगित कर अगले शुक्रवार को करें।
  • रजस्वला स्त्रियाँ एवं बीमार व्यक्ति उस शुक्रवार को छोड़ सकते हैं।
  • कुल व्रतों की संख्या मन्नत अनुसार पूरी होनी चाहिए।

व्रत उद्यापन

  • अंतिम शुक्रवार को विधिपूर्वक व्रत का उद्यापन करें।
  • सात कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं।
  • अपनी श्रद्धा अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रतकथा की पुस्तकें बाँटे।

व्रत प्रारंभ करने की विधि

  • शुक्रवार को प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत की तैयारी के साथ-साथ “जय माँ वैभव लक्ष्मी” का जाप करें।

पूजन विधि

  • चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर ताँबे का कलश रखें।
  • कलश पर कटोरी में चाँदी का रुपया या आभूषण रखें।
  • शुद्ध घी का दीपक, अगरबत्ती जलाएँ।
  • माँ के स्वरूपों और श्री यंत्र को प्रणाम करें।

प्रसाद और स्तुति

  • नैवेद्य: खीर, गुड़, शक्कर आदि रखें।
  • वैभव लक्ष्मी की स्तुति करें और व्रतकथा पढ़ें।

पूजन सामग्री सूची:

रोली, मौली, धूप, अगरबत्ती, ऋतुफल, पान, पुष्प, पुष्पमाला, दूब, दही, शहद, घी, मेहंदी, सिंदूर, गुड़, बताशे, श्वेत वस्त्र, लाल वस्त्र, हल्दी, चावल, पंचमेवा, लौंग, इलायची, श्रीफल, दीपक, रूई, माचिस, पंचपल्लव, सुपारी, समिधा, हवन सामग्री, लोटा, कटोरी, चम्मच।

वैभव लक्ष्मी पूजन मंत्र:

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मी सुरपूजिते । नमोऽस्तुते ।।
प‌द्मासन स्थिते देवि वैभवलक्ष्मि स्वरूपिणि। सर्वपाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥
श्वेतांबर धरे देवि नाना अलंकार भूषिते। जगत् स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ।।

वैभव लक्ष्मी ध्यान मंत्र:

आसीना सरसीरुहे स्मितमुखी हस्ताम्बुजौर्विभृती,
दानं प‌द्म युगाभये च वपुषा सौदामिनी सन्निभा॥
मुक्ताहार विरान पृथुलोत्तुंगस्यनोद्भासिनी।
वायाद्वः कमल कटाक्ष विभवैरानंदयंती हरिम् ।।

 

 

 

 

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