शौनक जी ने सूत जी से पूछा — “हे महाभाग! आपके मुख से अनेक आख्यान सुने, परन्तु मुझे तृप्ति नहीं हुई। फिर भी सुनने की इच्छा निरंतर बढ़ती जा रही है। कृपा करके ऐसी कोई कथा कहिए, जिसके श्रवण मात्र से मेरी अन्यत्र श्रवण करने की इच्छा समाप्त हो जाए।”
सूत जी बोले — “हे मुनिगण! आपके कहने से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। आपके लिए मुझसे कुछ भी गुप्त नहीं है। धर्मशास्त्रों के अनुसार एक उत्तम श्रोता में बारह गुणों का होना अनिवार्य है — जैसे कि दम्भ रहित होना, आस्तिक बुद्धि रखना, शठता का अभाव, परमात्मा में भक्ति होना, सुनने की सच्ची इच्छा होना, नम्रता, ब्राह्मणों के प्रति भक्ति, सुशील स्वभाव, धैर्यशीलता, पवित्रता, तपस्विता और दोषारोपण से रहित होना। ये सभी गुण आप सब में विद्यमान हैं, इसलिए मैं आपसे तत्व की बातें कहता हूँ।”
एक बार ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा — “हे सनत्कुमार! हे सुव्रत! हे ब्रह्मा के पुत्र! तुम्हारी सेवा और भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें एक अत्यंत गुप्त बात कहता हूँ। बारह महीनों में श्रावण मास मुझे अत्यंत प्रिय है। इस मास को ‘श्रावण’ इसलिए कहा गया क्योंकि इसकी पूर्णिमा तिथि को श्रवण नक्षत्र का संयोग होता है। साथ ही, यह मास सिद्धि प्रदान करने वाला भी है। आकाश की भांति स्वच्छता प्रदान करने के कारण इसे ‘नभा’ भी कहा गया है। इस मास के धर्मों की महिमा का बखान करने के लिए कौन समर्थ हो सकता है? इसके सम्पूर्ण फलों को बताने के लिए स्वयं ब्रह्मा हुए, इसके महात्म्य को देखने के लिए इन्द्र हुए और इसके फल को प्रकट करने के लिए भगवान अनन्त ने दो सहस्त्र जिह्वाएं धारण कीं। इससे अधिक क्या कहा जाए — इस मास की महिमा को कोई भी पूर्ण रूप से नहीं बता सकता। हे मुनि! अन्य कोई भी मास श्रावण मास की एक कला को भी नहीं प्राप्त कर सकता। यह मास संपूर्ण रूप से धर्ममय है। इस मास का कोई भी दिन व्रत रहित नहीं होता। हर तिथि में किसी न किसी व्रत की महिमा है।”
सनत्कुमार ने पूछा — “हे भगवान! आपने कहा कि श्रावण मास का कोई भी दिन व्रत से शून्य नहीं होता। कृपया विस्तार से बताइए कि किस तिथि में कौन-सा व्रत किया जाता है, और किस वार को कौन-सा व्रत होता है। उन व्रतों के अधिकारी कौन हैं, उनका फल क्या है, विधि क्या है, किसने इन व्रतों को किया, उनके उद्यापन की विधि क्या है, व्रत के देवता कौन हैं, पूज्य कौन हैं, पूजन सामग्री क्या है, प्रमुख पूजन किसका होता है, जागरण की विधि क्या है और किस व्रत का समय क्या है?
हे प्रभो! कृपा करके बताइए कि श्रावण मास आपको इतना प्रिय क्यों है? इसे सबसे पवित्र मास क्यों कहा जाता है? इस मास में कौन से अनुष्ठान करने योग्य हैं? मैं एक साधारण शिष्य हूं, अतः जो कुछ पूछने से रह गया हो वह भी मुझसे कहिए।”


