वेदनिधि ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर लोमश ऋषि से कहा—
“हे महर्षि! कृपा करके शीघ्र धर्म का उपदेश दीजिए, क्योंकि श्राप की अग्नि अत्यंत दुःखदायी होती है और इसके प्रभाव से ये सभी बहुत पीड़ा भोग रहे हैं।”
तब करुणामय लोमश ऋषि ने कहा—
“इन सबका उद्धार निश्चित है। ये सभी मेरे सान्निध्य में नियमपूर्वक माघ मास का स्नान करें। ऐसा करने से अंततः ये श्राप से मुक्त हो जाएंगे।”
ऋषि ने आगे कहा—
“मेरा यह दृढ़ निश्चय है कि शुभ और पवित्र तीर्थ में विधिपूर्वक किया गया माघ स्नान, भयंकर से भयंकर श्राप के फल को भी नष्ट कर देता है। माघ मास में तीर्थ स्थान पर स्नान करने से सात जन्मों के पाप तथा वर्तमान जन्म के समस्त पाप क्षीण हो जाते हैं।”
लोमश ऋषि ने बताया—
“इस पवित्र अच्छोद सरोवर में माघ मास का स्नान करने से मनुष्य को अवश्य ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। राजसूय यज्ञ और अश्वमेघ यज्ञ जैसे महान यज्ञों से जो फल प्राप्त होता है, उससे भी अधिक पुण्यफल केवल माघ मास के स्नान से प्राप्त हो जाता है।”
अंत में ऋषि ने कहा—
“जब माघ स्नान सहज रूप से संपूर्ण पापों का नाश करने वाला, दुःखों को हरने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला है, तब भला ऐसा पुण्यदायक व्रत क्यों न किया जाए? इसलिए माघ मास में श्रद्धा और नियम से तीर्थ स्नान अवश्य करना चाहिए।”